Wednesday, January 4, 2012

"તુષાર શુક્લ"

ठंडमे सिकुड़नेका, गर्मियोमे पिघलनेका, बारिशोमे बरसनेका, खिडकीसे निहारनेका , दरवाजा ताकनेका, बिस्तरकी सिलवटोंपे प्यारसे उंगलियाँ फेरनेका, बाथरुम्मे बाल्तिसे गिरते पानीके साथ गुनगुनानेका, बेटीके बाल बनानेका, रसोइमे कुकरकी सिटी सुननेका,भोजन चबाते हुए आवाज करनेका, रातको छतपे साथ साथ टहलनेका, चाँदनीमे चुपचाप खड़े रहेनेका, तारोकी गिनतीमे फिरसे भूल करनेका, आयनेमे देखके अंगड़ाई लेते हुए शर्मानेका, शर्टके टूटे बटनको याद करनेका, कामकाजके समय यूँही अकेले मुस्कुरानेका , घर आकर दरवाजा खुला पानेका, प्रियको गले लगानेका,बेटेकी मोटर सायकिल के पीछे बैठनेका, जानी अनजानी सडकों पे घूमनेका,अपने पते पे वापस आनेका और खुदका पता पानेका नाम ही है सुख ! यह सुख आपको वर्ष भर मिले..मिलता ही रहे ऐसी शुभ कामना!

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